Electric Circuit in Hindi | Types of Circuit in Hindi

Electric Circuit in Hindi

अगर आप इलेक्ट्रीशियन है या इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हो, तो आपको Electric Circuit in Hindi के बारे पता होना चाहिए | आज में आपको Electric Circuit के बारे में बताने वाला हूँ, Electric Circuit क्या होता है? और उसके प्रकार आइये हम समझते है, किसी कंडक्टर को Continous रास्ता के तरह बनाए जाए, और उस में Continous path में पावर सप्लाई दी जाए तो उसमे करंट फ्लो होने लग जायेगा | इसे ही Circuit (सर्किट) कहते है | Example के लिए बैटरी के Positive Terminal से करंट कंडक्टर के माध्यम से स्विच और लैंप में होकर Negative Terminal तक जाए उसे हम Electric Circuit (सर्किट) कहते है | जैसे की आप निचे सर्किट में देख सकते हो |

Electric Circuit in Hindi  Types of Circuit in Hindi
Electric Circuit


हम आपको डायग्राम की माध्यम से पूरी तरह समझाते है, जैसे की निचे सर्किट में देख रहे हो की सर्किट में कुछ पार्ट्स की लगे हुए हे, जैसे की बैटरी, वायर , स्विच और एक LED बल्ब | बैटरी में दो टर्मिनल होते है जो की पावर सप्लाई का काम करते है | स्विच ON और OFF के Use किया जाता है | और वायर यानी कंडक्टर इन सबको जोड़कर Continous path बना रहा है |


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ऊपर सर्किट में बैटरी के पॉजिटिव टर्मिनल से करंट हो कर स्विच में से बल्ब में जा के बल्ब ग्लो कर रहा है | सर्किट को शुरू करने के लिए बैटरी के पॉजिटिव टर्मिनल से और कम्पलीट हो कर निगेटिव टर्मिनल तक जाकर एक कम्पलीट सर्किट कहलाता है |  इसे Complete Circuit भी कहा जाता है | अभी आपको पता चल गया होगा की सर्किट क्या होता है | आइए सर्किट के प्रकार देखते है,


Types of Circuit in Hindi


1. Closed Circuit (पूर्ण सर्किट):–

जब किसी Electric Circuit में करंट आसानी से और सुरक्षा नियंत्रक गुजरता है, और वह उपकरण बिल्कुल सही से काम करता है उसे हम एक Closed Circuit (पूर्ण सर्किट) कहते हैं | बैटरी के पॉजिटिव टर्मिनल के एक सिरे की बल्ब के एक तरफ लगा दिया जाए, और बैटरी के नेगेटिव टर्मिनल से बल्ब के दूसरे सिरे में जोड़ दिया जाए और बीच में से कही भी ब्रेक या टुटा ना हो तो उसे Complete सर्किट और Closed Circuit भी कहा जाता है |  जैसे की आप ऊपर Image में देख रहे हो की वह भी एक तरह का कम्पलीट सर्किट है |

2. Open Circuit (खुला परिपथ) :-

जब किसी सर्किट का वायर ब्रेक हो जाए या फिर स्विच ख़राब हो जाए तो वह इलेक्ट्रिक सर्किट काम नहीं करेगा क्योंकि वह इलेक्ट्रिक सर्किट पूरा नहीं हो पाता और जैसे की आप डायग्राम में देख रहे हो की बैटरी की पावर सप्लाई उपकरण तक नहीं पहुंच रही है जिसके कारण वह लाइट ग्लो  नहीं कर रहा है जिसे हम Open Circuit कहते हैं |
Electric Circuit in Hindi  Types of Circuit in Hindi
Open Circuit


3. Short Circuit (शार्ट सर्किट):-

जैसे की आप नीचे सर्किट में देख रहे हो की Phase Wire और न्यूट्रल वायर आपस में जुड़ जाएं तो उसमें बहुत ज्यादा करंट प्रवाहित होगा जिसके कारण यहाँ तक कि वायर का इंसुलेशन भी जल सकता है | हम इसे Short Circuit ( शार्ट सर्किट ) कहते हैं | ऐसा ना हो इसीलिए हम सब MCB का प्रयोग करते ताकि Short Circuit होने पर जल्द से जल्द ट्रिप हो जाए |

4.Leakage Circuit (लीकेज सर्किट):-

जब किसी इलेक्ट्रिक सर्किट का Phase Wire किसी भी बॉडी को टच हो जाए, तो उस बॉडी में जो करंट बहता है उसे हम Leakage Current ( लीकेज करंट ) कहते है | जिस भी डिवाइस में लीकेज करंट होता है | इस वजह से सर्किट करंट में सही से फ्लो नहीं हो पता हे, इसीलिए  उपकरण सही तरह से काम नहीं करता है |
Electric Circuit in Hindi  Types of Circuit in Hindi
Leakage Circuit









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Conductor, Insulator And Semiconductor In Hindi | चालक, कुचालक और अर्धचालक किसे कहते है?

Conductor, Insulator, and Semiconductor in Hindi 

इस टॉपिक में हम Conductor, Insulator and Semiconductor in Hindi के बारे पड़ेंगे | आपने घरो में देखा होगा की, कोई भी इलेक्ट्रिकल वस्तुओ को सप्लाई की जरूरत होती और इस सप्लाई को तार से जोड़कर इलेक्ट्रिकल वस्तुओ में दिया जाता है | जैसे बल्ब को तार से जोड़कर सप्लाई दिया जाता है तो बल्ब जलने लगता है | आपने तार के ऊपर इंसुलेशन देखा होगा उसे ही Insulator कहते है | Insulator हमें प्रोटेक्शन देता है यानी करंट को रोके का काम करता है | हमें शॉक ना लगे इसीलिए इसका Use किया जाता है | सेमीकंडक्टर को आपने कई रूपों में देखा होगा जैसे की टीवी या कम्प्यूटर के अंदर डायोड या ट्रांजिस्टर को देखा होगा | यह दोनों सेमीकंडक्टर के Examples है | आइये इन सबको विस्तार से पड़ते है |

 Conductor, Insulator And Semiconductor In Hindi | चालक, कुचालक और अर्धचालक किसे कहते है?
  Conductor, Insulator, And Semiconductor In Hindi

   
Conductor (चालक) किसे कहते है?

ऐसे पदार्थ जिनमें विधुत प्रवाह आसानी से हो सके अर्थात चार्ज आसानी से फ्लो हो सके, उसे Conductor (चालक) कहते है। जैसे की लोहा, एल्युमीनियम, ताम्बा, पारा, अम्ल और क्षार, ग्रेफाइट, नमक का विलयन यह सभी एक तरह के Conductors है और इन सब में आसानी से करंट फ्लो हो जाता है | Conductors में फ्री इलेक्ट्रान होते हे, इसीलिए इनमे आसानी से करंट फ्लो हो जाता है | इस में सबसे अच्छा Conductor ताम्बा (Copper) है परन्तु यह बहुत महंगा होता है इसीलिए हम एल्युमीनियम को ज्यादातर Use करते है जैसे की इंडस्ट्रियल और घरेलू  में ज्यादा एल्युमीनियम Use करते है |

Insulator (कुचालक)  किसे कहते है?

ऐसे पदार्थ जिनमें विधुत प्रवाह आसानी से नहीं हो पाता है ऐसे पदार्थ को Insulator (कुचालक) कहते है। जैसे की रबर, ऐबोनाइट, लकड़ी, कागज, वायु, कांच, प्लास्टिक यह सभी एक तरह के Insulator है | और इन सब में आसानी से करंट फ्लो नहीं हो जाता है | Insulator में फ्री इलेक्ट्रान नहीं होते है, और इनमे इलेक्ट्रान Tightly packed होते है, इसीलिए इनमे करंट आसानी से फ्लो नही होते है |

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Plug


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Semiconductor (अर्धचालक) किसे कहते है?

Semiconductor (अर्धचालक) पदार्थ वह होता है जिसके दो तरह के गुण होते है | अर्धचालक ऐसा पदार्थ जिसकी प्रॉपर्टी अर्ध चालक है और अर्ध कुचालक होती है | चालक तथा कुचालक के मध्य का होता हैं। ऐसे पदार्थ को Semiconductor (अर्धचालक) कहते है | जर्मेनियम तथा सिलिकॉन इन पदार्थ के उदाहरण हैं। सबसे अच्छा P-N Junction Diode उदाहरण है | Semiconductor दो प्रकार के होते है |

1) Intrinsic Semiconductor 
2) Extrinsic Semiconductor

Intrinsic Semiconductor एक तरह से Pure होता है | और Extrinsic Semiconductor एक तरह से Impure होता है इसके दो प्रकार होते है 1) P Type Semiconductor 2) N Type Semiconductor





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Electric Field | Magnetic Field | Magnetic Flux in Hindi

1. Electric Field ( विद्युत क्षेत्र ) in Hindi

हर एक विद्युत आवेश (Electric Charge) अपने आसपास एक क्षेत्र बना लेता है | जब आवेश के द्वारा उत्पन्न क्षेत्र में कोई अन्य कोई आवेश रखा जाता है, तो पहले आवेश दूसरे आवेश की होने को महसूस करता है | उसी क्षेत्र को Electric Field कहते है | आप इमेज में देख रहे हो की, जब उसे महसूस हुआ की उसके आसपास कोई दूसरा चार्ज भी हे तो उसने उसकी अपनी Electric Field जेनेरेट की, इसी फील्ड को Electric Field कहते है |

 Electric Field | Magnetic Field | Magnetic Flux in Hindi
Electric Field in Hindi


Electric Field
 में दो समान चार्ज ( Positive - Positive) ( Negative - Negative )  एक दूसरे को Repel करेंगे यानी एक दूसरे से दूर जायेंगे और दो अलग चार्जेज ( Positive - Negative ) ( Negative - Positive ) एक दूसरे को अट्रैक्शन करते है | यह सब उनके प्रॉपर्टी के कारण होता है | जैसे की आप निचे डायग्राम में देख सकते हो,

 Electric Field | Magnetic Field | Magnetic Flux in Hindi
Attraction of Charges

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2. Magnetic Field (चुंबकीय क्षेत्र  ) in Hindi

इसे हम आसानी से समझते है कि चुंबकीय क्षेत्र या Magnetic Field वह Area है जहाँ तक किसी Magnet का Effect या प्रभाव रहता है | इसे ही हम चुंबकीय क्षेत्र या Magnetic field कहते है | इसे B से दर्शाते है इसको Tesla में मापते है |

 Electric Field | Magnetic Field | Magnetic Flux in Hindi
Magnetic Field in Field

Hans Christian Oersted इन्होने एक Experiment  किया की जब किसी सर्किट में करंट फ्लो होता है तो उस कंडक्टर के आसपास मैग्नेटिक फील्ड जेनेरेट होती है | इसे Oersted  experiment कहते है | जब करंट की डायरेक्शन Upward होगी तब मैग्नेटिक फील्ड की डायरेक्शन Anticlockwise होती है | और जब करंट की डायरेक्शन Downward होगी तब मैग्नेटिक फील्ड की डायरेक्शन Clockwise होती है | By Right Hand Thumb Rule

3. Magnetic Flux ( चुंबकीय फ्लक्स ) in Hindi

जब किसी चुंबकीय क्षेत्र में  किसी Particular Area से चुंबकीय रेखाएं गुजरती है उन चुंबकीय रेखा के संख्याओं को चुंबकीय फ्लक्स ( Magnetic Flux ) कहते है | चुंबकीय फ्लक्स की SI यूनिट वेबर Weber (Wb) है | इसे भी आप इमेज देख रहे हो की एक Particular Area में से Number of Magnetic Lines निकल कर जा रही उन Magnetic Lines की संख्याओं को ही Magnetic Flux कहते है |


 Electric Field | Magnetic Field | Magnetic Flux in Hindi
Magnetic Flux






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Electrical Power and Energy in Hindi

What is Electrical Power in Hindi?

कार्य करने की दर को Power (शक्ति) कहा जाता है। इलेक्ट्रिकल Language में, किसी भी सर्किट में कितनी एनर्जी Consumed या Delivered हो रही है इसे Electrical Power (शक्ति) कहते है | Electrical Power को P से Denote करते है | Electrical Power की S.I. यूनिट वाट (Watt) है | जैसे की,

Power = Energy/Time   
Watt = Joule / Second 

जब किसी सर्किट में 5V की बैटरी लगी और उसमे से 2A का करंट बह रहा है तो उसमे 10W की Electrical Power बह रही होगी | इसे Find करने के लिए,

Electrical Power (शक्ति)  = Current (धारा) x Voltage (विभवान्तर)

Electrical Power and Energy in Hindi
Electrical Power in Hindi


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What is Energy (ऊर्जा)?

कार्य करने की क्षमता को Energy (ऊर्जा) कहा जाता है। यह Potential Energy, Kinetic Energy, Thermal Energy, Chemical Energy, Electrical Energy, Nuclear Energy या बहुत से विभिन्न रूपों में मौजूद हो सकता है। ऊर्जा की SI यूनिट Joule  है।

Energy को कभी भी पैदा नहीं कर सकते है और ना ही खत्म कर सकते है | Energy सिर्फ एक form से दूसरे form में change होती है | जैसे की हाइड्रो पावर प्लांट में देखा होगा की पहले पानी स्थैतिक होता है यानी पोटेंशियल एनर्जी में होता है और वह टरबाइन में जाता है तो वह Kinetic Energy में कन्वर्ट हो जाता है | टरबाइन भी Rotational एनर्जी को मैकेनिकल में कन्वर्ट करके Generator से इलेक्ट्रिसिटी प्रोडूस होती है |

Electrical Energy उत्पादन के भिन्न भिन्न प्रकार है है जैसे की, थर्मल पावर प्लांट, हाइड्रो पावर प्लांट, सोलर पावर प्लांट, विंड पावर प्लांट इत्यादी |   

Energy (ऊर्जा) = Power (शक्ति)  x Time (समय) 

अगर एक इंसान पत्थर फोड़ रहा है, तो उसके हाथो से लगने वाली ताकत को पावर कहते है | और वो इंसान कब तक उस पत्थर को फोड़ते रहता है, उसे उस इन्सान की एनर्जी कहेंगे | आप इस उदाहरण से अच्छे से समज गए होंगे की Energy और Power क्या होते है |






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Electric Charge in Hindi | Types | Formula

Electric Charge in Hindi

आज हम Electric Charge के बारे जानेंगे हिंदी में, दुनिया में जो भी चीजे और वस्तुएं है वो सभी छोटे छोटे कणों से मिलकर बने होते है या फिर जुड़े होते हैं, उदाहरण के लिए इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और कई अन्य। अब समजते इलेक्ट्रिकल भाषा में, Electric Charge एक तरह की प्रॉपर्टी या फिर गुण है जो किसी वस्तु या पदार्थ में डिस्टर्बेंस होने के कारण उसमें विद्युत फील्ड Generate होती हैं, जिस गुण (Electric Charge) के कारण यह फील्ड Generate हो रही है उस गुण को हम Electric Charge कहते है |

Electric Charge in Hindi | Types | Formula
Electric Charges


इसे Examples के द्वारा समझते है, जब कोई दो चीजे या वस्तुएं को आपस में घिसते है तो उनमे मौजूद इलेक्ट्रानस में डिस्टर्बेंस क्रिएट होता है | एक के इलेक्ट्रान दूसरे में ट्रांसफर होने के कारण पहले वाले में इलेक्ट्रॉन्स की संख्याऐं बढ़ जाती है तो उसमे इलेक्ट्रिसिटी प्रोडूस होती है उसे ही Static Electricty कहते है | इलेक्ट्रिक चार्ज को Q से Denote करते हैं। यह एक तरह की अदिश राशि है। Electric Charge की SI unit Coulomb है |



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Types of Electric Charge in Hindi 

Electric Charge दो प्रकार के होते हैं

1. धनात्मक आवेश ( Positive Charge )
2. ऋणात्मक आवेश ( Negative Charge )

इलेक्ट्रान में ऋणात्मक आवेश या Negative Charge होता है और प्रोटोन में धनात्मक आवेश या  Positive Charge होता है इन दोनों में दो तरह के बल लगते है एक होता है Attraction और  दूसरा होता है Repulsion इसे हम अच्छे से समझते है दो समान प्रकार के आवेश जैसे की ( इलेक्ट्रान - इलेक्ट्रान ) और (प्रोटोन -प्रोटोन ) हमेशा एक दूसरे को प्रतिकर्षित (Repel) करते हैं तथा दो विपरीत आवेश जैसे की ( इलेक्ट्रान - प्रोटोन ) और (प्रोटोन - इलेक्ट्रान) एक दूसरे को आकर्षित (Attract) करते हैं | इन सब को हम  डायग्राम के माध्यम से समझते है आपको डायग्राम के माध्यम से पूरा क्लियर हो जायेगा |

Electric Charge in Hindi | Types | Formula
Reaction of Electric Charges


Formula of Electric Charge

Q = n e     

जहाँ
Q = आवेश  (1 कूलाम्ब आवेश  = 6.24 x 1018  इलेक्ट्रान)
n = इलेक्ट्रानो की संख्या
e =  –1.6× 10-19 coulombs
                                                                               
                                                                               



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What is Voltage in Hindi? | सूत्र | मापने का यंत्र

What is Voltage in Hindi?

हमने पिछले टॉपिक में सीखा की Electric Current फ्लो होता है | परन्तु Electric Current को फ्लो करने में एक तरह का फाॅर्स लगाना होता है जो की Voltage करता है | Voltage एक तरह का फाॅर्स हे जो इलेक्ट्रान को किसी इलेक्ट्रिक सर्किट में एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का काम करता है | इसे हम एक तरह से इलेक्ट्रिक फाॅर्स भी कह सकते है, जो की इलेक्ट्रॉन्स को एक Atom से दूसरे Atom तक ले जाने का काम करता है | What is Voltage हिंदी में सिंपल सी डेफिनिशन है की, किसी इलेक्ट्रिक सर्किट में चार्जेज एक जगह से दूसरे जगह Move कर रहे है इसमें जितना भी काम हुआ हो, उस काम को Potential या फिर Voltage भी कहते हैं |


What is Voltage in Hindi? | सूत्र | मापने का यंत्र
Potential

अब हम समझते है की Potential Difference क्या होता है, Potential Difference को ही Potential कहते है परन्तु इसमें डिफरेंस दर्शाया जाता है जैसे की अगर A पॉइंट से B पॉइंट तक चार्जेज मूव करते है तो जो A पॉइंट पे क्रिएट हुआ पोटेंशियल Va और B पॉइंट पे क्रिएट हुआ पोटेंशियल Vb इन दोनो का Substraction यानी माइनस की वैल्यू को इसे ही Potential Difference कहते है | ( Va - Vb )

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Electric Current किसे कहते है? | Direction of Electric Current in Hindi 

अब यह फाॅर्स क्रिएट कहा से क्रिएट होता है | यहाँ फाॅर्स Higher Potential to Lower Potential क्रिएट होता है | इसे समझने के एक Example देखते है | आपने झरना देखा होगा झरना ऊपर से निचे की और बहता है इसका मतलब है की Higher Potential to Lower Potential की तरह बहता है | कोई भी चीज High तो Low ही फ्लो होती है, ऐसे ही इलेक्ट्रिक करंट भी है जो की Higher Potential to Lower Potential की तरफ बहता है | इलेक्ट्रिकल के केस में Potential बैटरी से क्रिएट होता है | इलेक्ट्रिकल लैंग्वेज में बैटरी Potential का बेस्ट एक्साम्प्ले है | बटेरी के अंदर केमिकल रिएक्शन हो के Higher Potential to Lower Potential क्रिएट होता है | Voltage को V से Denote करते है और वोल्टेज की S.I. Unit वोल्ट है | इसे  EMF ( Electromotive Force ) भी कहते है  |

What is Voltage in Hindi? | सूत्र | मापने का यंत्र
Higher Potential to lower Potential


Voltage का सूत्र

V=W/Q
जहां,
    V= Voltage ( V )
    W= Work Done ( J )
    Q= Charges ( C ) 

Voltage को  मापने का यंत्र

किसी भी सर्किट में Voltage को मापने के लिए हम Voltmeter या मल्टीमीटर का उपयोग किया जाता है | Voltage को मापने के लिए हमें Voltmeter या मल्टीमीटर को सर्किट में Parallel में कनेक्ट किया जाता है | जैसे की आप सर्किट में देख रहे हो Voltmeter का एक सिरा Va पर है दूसरा सिरा Vb है जब भी Voltmeter को सर्किट में पैरेलल में कनेक्ट किया जाता है तो Voltmeter भी सर्किट का एक पार्ट बन जाता है | इस वजह से आउटपुट में कोई भी चेंज या Disturbance नहीं होना चाहिए इसीलिए वाल्टमीटर का रेजिस्टेंस हाई रखा जाता है | 
What is Voltage in Hindi? | सूत्र | मापने का यंत्र
Voltmeter





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Electric Current किसे कहते है? | Direction of Electric Current in Hindi | सूत्र | मापने का यंत्र

Electric Current किसे कहते है?

इस टॉपिक में हम आपको Electric Current के बारे में पूरी जानकारी देंगे | इस में हम Electric Current किसे कहते है | सूत्र | मापने का यंत्र के टॉपिक्स कवर करेंगे और पिछले टॉपिक में हमने सीखा की Electricity क्या होती है? आइये हम हमारे Main टॉपिक पे आते है |

Electric Current की सिंपल डेफिनिशन है की Flowing of Electric Charge इसका  मतलब कि Electric Current इलेक्ट्रॉन और प्रोटोन का प्रवाह है, Electric Current और इलेक्ट्रॉन विपरीत दिशा में प्रवाह करते हैं। Electric Current का फ्लो पॉजिटिव से नेगेटिव की तरफ जाता है और इलेक्ट्रॉन का फ्लो  नेगेटिव से होकर पॉजिटिव की तरफ जाता है। इसीलिए मेने कहा Flowing of Electric Charge इसे ही विद्युत धारा यानी Electric current कहते है |
Electric Current किसे कहते है  Direction of Electric Current in Hindi  सूत्र  मापने का यंत्र
Electric Circuit


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Direction of Electric Current in Hindi 


अब हम देखेंगे की Electric Current की Direction कैसी होती है | Conventional Current की  Direction Positive टर्मिनल से Negative टर्मिनल होती है | और इलेक्ट्रान की डायरेक्शन Negative  टर्मिनल से Positive टर्मिनल होती है | यह दोनों एक दूसरे के अपोजिट होते है | जैसे की आप ऊपर या फिर नीचे के सर्किट में देख सकते हो की सर्किट में Positive टर्मिनल से होकर Negative टर्मिनल की तरफ करंट फ्लो कर रहा है परन्तु अंदर का जो फिनामिना है, वह ऐसा की Negative टर्मिनल से Positive टर्मिनल  की तरफ इलेक्ट्रान मूव करते है | आउटर करंट की डायरेक्शन है ( Positive to Negative ) और इनर करंट की डायरेक्शन है ( Negative to Positive
Electric Current किसे कहते है  Direction of Electric Current in Hindi  सूत्र  मापने का यंत्र
Direction of Conventional Current

Electric Current का सूत्र

Q = I x t

जहां,
            I = Current
           Q=विद्युत आवेश
            t = समय

एक कूलम्ब में कितने इलेक्ट्रान होते है आइये देखते निचे दिए गए Numerical से,

Electric Current किसे कहते है  Direction of Electric Current in Hindi  सूत्र  मापने का यंत्र
1 Electron

Electric Current मापने का यंत्र

किसी भी सर्किट में करंट को मापने के लिए हम एम्पीयर मीटर या एमीटर का उपयोग करते है । करंट को मापने के लिए हमें एम्पीयर (Ammeter) मीटर को सर्किट में सीरीज में कनेक्ट करना होता है | ऐसा इसीलिए किया जाता है क्योंकी सीरीज में रेजिस्टेंस की वैल्यू बहुत ही कम होती है | अमीटर को हम जब सीरीज में लगाते है तो वह एक तरह से सर्किट का ही पार्ट बन जाता है जैसे की आप नीचे सर्किट डायग्राम में देख सकते हो | इसीलिए Ammeter का रेजिस्टेंस बहुत ही लौ रखना होता है क्युकी सर्किट में कोई चेंज (Disturbance) नहीं होना चाहिए | अगर ऐसा होगा तो सर्किट को आउट में करंट काम मिलने लगेगा | इसीलिए Ammeter में रेजिस्टेंस की वैल्यू बहुत ही कम रखी जाती है | इस वजह से हम सब अमीटर से करंट आसानी से और एक्यूरेट Measure कर सकते है |  एम्पीयर मीटर या एमीटर को कई इंडस्ट्रियल या फिर किसी दुकानों पर कई जगह पर देखा होगा | एम्पीयर को A से डिनोट करते हे |

करंट को हम काम और ज्यादा दोनों पैमाने में use करते है | जैसे की किसी भी इंडस्ट्रियल एरिया में ज्यादा पैमाने में करंट यूज़ होता है और किसी छोटे इलेक्ट्रॉनिक सर्किट्स में करंट को कम पैमाने में यूज़ किया जाता है जैसे की Miliampere और Microampere | इन दोनों के रिलेशन निचे दिए गए है |

1)  1mA = 10-3 A
2)  1µA = 10-6 A

इलेक्ट्रॉन यानी Electric Current जहा भी आसानी से आगे फ्लो हो जाए है उसे कंडक्टर (Conductor) कहते है | जैसे की गोल्ड, सिल्वर, कॉपर, ताम्बा इत्यादि | कॉपर सबसे महंगा होता है | इसीलिए सबसे ज्यादा ताम्बा को use किया ज्यादा है |

और जहा से भी इलेक्ट्रॉन यानी Electric Current आसानी फ्लो नहीं हो पाता है उसे इन्सुलेटर (Insulator) कहते है । जैसे की लकड़ी, प्लास्टिक 





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